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Right 💯 #📖Whatsapp शायरी #☪ सूफी संगीत 🕌
📖Whatsapp शायरी - हाजियों को देख कर हज पर जाने की तमन्ना तो होती है फिर नमाज़ियों को देख कर नमाज़ पढ़ने की तमन्ना क्यों नहीं होती है आख़िर फ़र्ज़ तो दोनों ही हैं और फिर नमाज़ के ಞ' तो कुछ ख़र्च भी नहीं होता है। Its worth thinking about. हाजियों को देख कर हज पर जाने की तमन्ना तो होती है फिर नमाज़ियों को देख कर नमाज़ पढ़ने की तमन्ना क्यों नहीं होती है आख़िर फ़र्ज़ तो दोनों ही हैं और फिर नमाज़ के ಞ' तो कुछ ख़र्च भी नहीं होता है। Its worth thinking about. - ShareChat