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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - गिर गिर कर मैं उठ गया हूँ उँगली पकड़ कर बढ़ ग्या 8 ना जाने क्यू अकेला पड़ गया हूँ माँ अब झूठे रिश्तों से उखड़ गया हूँ मिटाना चाहा , बहुतों मुझको धोके दिए है अपनों ने मुझको मेरे ही सपनों ने, डरा दिया था मुझको माँ मुझे बहुत सताया औ़र बाटा d 4 टुकडो माँ के आँचल में जब छिप गया हूँ जितना गिरा था मैँ कहीं ज़्यादा उठ गया हूँ बात अब ये कोई कैसे मान पाएगा, जिस माँ ने जून्मा क्या उससे कोई छीन पाएगा भी जो ताकत मानी है 0I0IdI0] जिसने भगवान को जन्मा वो माँ भवानी है कष्ठ हुए है दूर उस माँ के आशीर्वाद से, मैं इंसान बन रहा हूँ बस उसके दुलार से गिर गिर कर मैं उठ गया हूँ उँगली पकड़ कर बढ़ ग्या 8 ना जाने क्यू अकेला पड़ गया हूँ माँ अब झूठे रिश्तों से उखड़ गया हूँ मिटाना चाहा , बहुतों मुझको धोके दिए है अपनों ने मुझको मेरे ही सपनों ने, डरा दिया था मुझको माँ मुझे बहुत सताया औ़र बाटा d 4 टुकडो माँ के आँचल में जब छिप गया हूँ जितना गिरा था मैँ कहीं ज़्यादा उठ गया हूँ बात अब ये कोई कैसे मान पाएगा, जिस माँ ने जून्मा क्या उससे कोई छीन पाएगा भी जो ताकत मानी है 0I0IdI0] जिसने भगवान को जन्मा वो माँ भवानी है कष्ठ हुए है दूर उस माँ के आशीर्वाद से, मैं इंसान बन रहा हूँ बस उसके दुलार से - ShareChat