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#😛 व्यंग्य 😛 #😵टाइम पास
😛 व्यंग्य 😛 - मिरी ज़बान के मौसम बदलते रहते हैं मैं आदमी हूँ मिरा ए'तिबार मत करना असीम वास्ती | अपनी हिन्दी dce@l मिरी ज़बान के मौसम बदलते रहते हैं मैं आदमी हूँ मिरा ए'तिबार मत करना असीम वास्ती | अपनी हिन्दी dce@l - ShareChat