#✋🛑अंतर्राष्ट्रीय यातना पीड़ित सहायता दिवस🫸 #📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡 #📚एजुकेशनल ज्ञान📝 #🧠 रीजनिंग नॉलेज😎
अगर सरकार चाहे तो संसद में नया कानून लाकर पुरुषों के अधिकारों की भी सुरक्षा कर सकती है।पुराने कानून बदले जाते हैं, नए कानून बनाए जाते हैं, दंड और प्रक्रियाओं में संशोधन होते हैं। फिर पुरुषों की सुरक्षा, झूठे मामलों की रोकथाम और लैंगिक रूप से निष्पक्ष कानूनों पर चर्चा क्यों नहीं?
अगर हर समस्या के लिए आज भी सिर्फ़ पिछली सरकारों को दोष दिया जाएगा, तो वर्तमान सरकार की जवाबदेही कौन तय करेगा?
12 साल से अधिक समय से सत्ता में होने के बाद भी यदि पुरुषों की समस्याओं पर ठोस कानूनी सुधार नहीं होते, तो सवाल पूछना लोकतंत्र का अधिकार है।
पुरुषों की आत्महत्याएँ, झूठे मामलों के आरोप, पारिवारिक विवादों में मानसिक प्रताड़ना और कानूनी असंतुलन जैसे मुद्दों पर भी गंभीर बहस और न्यायसंगत समाधान की आवश्यकता है।
न्याय का सिद्धांत एक ही होना चाहिए — कानून किसी एक लिंग के लिए नहीं, बल्कि हर नागरिक के लिए समान और निष्पक्ष होना चाहिए।
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