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#🙏सुविचार📿
🙏सुविचार📿 - हम औरत उसी को समझते हैं जो हमारे घर की हो, fg बाक़ी हमारे कोई औरत नहीं होती, बस गोश्त की दुकान होती है। और हम उस दुकान के बाहर खड़े कुत्तों की तरह होते हैं जिनकी हवस भरी नज़र हमेशा गोश्त पर टिकी रहती है। सआदत हसन मंटो हम औरत उसी को समझते हैं जो हमारे घर की हो, fg बाक़ी हमारे कोई औरत नहीं होती, बस गोश्त की दुकान होती है। और हम उस दुकान के बाहर खड़े कुत्तों की तरह होते हैं जिनकी हवस भरी नज़र हमेशा गोश्त पर टिकी रहती है। सआदत हसन मंटो - ShareChat