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#Qur'ân aur Hadees #RanaPeaceFoundation
Qur'ân aur Hadees - ডনে ন मुकम्मल हो चुका , तो नईन्नई रस्मों की क्या ज़रूरत? कुरआन का हुक़्मः आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन मुकम्मल कर दिया और तुम पर अपनी नेमत पूरी कर दी और तुम्हारे लिए इस्लाम को दीन पसंद कर लिया। " (মুফ্চ সল-সার্ড়না: 3) रसुलुल्लाह # ने फ़रमायाः ৬ "जिसने हमारे इस दीन में कोई ऐसी नई बात निकाली जो इसमें से नहीं है, तो वह मर्दूद है। " (सहीह बुखारीः २६९७ , सहीह मुस्लिमः १७१८) Tea दीन अल्लाह तआला ने नबी % के ज़माने में मुकम्मल कर दिया था। इसलिए दीन के नाम पर ऐसी नईन्नई रस्में, तरीक़े या इबादतें शुरू करना, जिनकी शरीअत में कोई दलील न हो, इंसान को गुमराही की तरफ़ ले जाता है। मजबूती से थामिए सुन्नत को और बिदअत से बचिए! Paigham-e-Rasool ডনে ন मुकम्मल हो चुका , तो नईन्नई रस्मों की क्या ज़रूरत? कुरआन का हुक़्मः आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन मुकम्मल कर दिया और तुम पर अपनी नेमत पूरी कर दी और तुम्हारे लिए इस्लाम को दीन पसंद कर लिया। " (মুফ্চ সল-সার্ড়না: 3) रसुलुल्लाह # ने फ़रमायाः ৬ "जिसने हमारे इस दीन में कोई ऐसी नई बात निकाली जो इसमें से नहीं है, तो वह मर्दूद है। " (सहीह बुखारीः २६९७ , सहीह मुस्लिमः १७१८) Tea दीन अल्लाह तआला ने नबी % के ज़माने में मुकम्मल कर दिया था। इसलिए दीन के नाम पर ऐसी नईन्नई रस्में, तरीक़े या इबादतें शुरू करना, जिनकी शरीअत में कोई दलील न हो, इंसान को गुमराही की तरफ़ ले जाता है। मजबूती से थामिए सुन्नत को और बिदअत से बचिए! Paigham-e-Rasool - ShareChat