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#✍️ साहित्य एवं शायरी #📚एजुकेशनल ज्ञान📝 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📓 हिंदी साहित्य #✡️ज्योतिष समाधान 🌟
✍️ साहित्य एवं शायरी - 66 किसी की याद का जंगल है, भाग्े जा रहा हूँ मैं, दुआओं में अब भी उसकी हूँ मैं। खुशियाँ ' मांगे जा रहा किसी की वो दुल्हन बनकर कहीं पर सो रही होगी , मुद्दत गुजरी है, अब भी रातों में जागे जा रहा हूँ मैं। Imran Pratapgarhi মাসাকন: नीतेश कुमार 66 किसी की याद का जंगल है, भाग्े जा रहा हूँ मैं, दुआओं में अब भी उसकी हूँ मैं। खुशियाँ ' मांगे जा रहा किसी की वो दुल्हन बनकर कहीं पर सो रही होगी , मुद्दत गुजरी है, अब भी रातों में जागे जा रहा हूँ मैं। Imran Pratapgarhi মাসাকন: नीतेश कुमार - ShareChat