ShareChat
click to see wallet page
search
#सोचने वाली बात #points to ponder #islam guide us in every field of life #*let us understand our religion #*આપણે વિચારીશું ખરા?* *અજ્ઞાનીઓ સાથે કઈ રીતે વર્તન કરવું તે પણ આપણને ઇસ્લામ ,કુર આન શીખવે છે. અલ્લાહ મને અને આ પણ સૌને અમલની તોફીક આપે.આમિન.* ૨૮/૪/૨૬
सोचने वाली बात - *भावार्थः* एक सच्चे आस्तिक की * पहचान उसका अहंकार मुक्त होना है। जब कोई उनसे दुर्व्यवहार करता है, तो वे पलटकर नहीं करते, बल्कि बुराई शांति और गरिमा के साथ जवाब देते గే **(3)  Quran*सूरा अल-्कसस (28.55)1 ** ४और जब वे व्यर्थ (बुरी) बार्तें सुनते हैं, तो उससे मुंह मोड़ लेते हैं और कहते हैं, हमारे लिए लिए हमारे कर्म हैं और तुम्हारे  कर्म। तुम पर शांति हो; 5R हम अज्ञानिरयों का साथ नहीं चाहते | १*  *भावार्थः* यह आयत * आत्म-सम्मान औ tcर सीमाएं तय करने पर जोर देती है। नेक लोग फालतू की बहस या गाली-गलौज में अपना समय नष्ट नहीं करते, बल्कि अपने काम से काम रखते हैं और दूसरों लिए भी शांति की दुआ करते हैं। چ *भावार्थः* एक सच्चे आस्तिक की * पहचान उसका अहंकार मुक्त होना है। जब कोई उनसे दुर्व्यवहार करता है, तो वे पलटकर नहीं करते, बल्कि बुराई शांति और गरिमा के साथ जवाब देते **(3)  Quran*सूरा अल-्कसस (28.55)1 ** ४और जब वे व्यर्थ (बुरी) बार्तें सुनते हैं, तो उससे मुंह मोड़ लेते हैं और कहते हैं, हमारे लिए लिए हमारे कर्म हैं और तुम्हारे  कर्म। तुम पर शांति हो; 5R हम अज्ञानिरयों का साथ नहीं चाहते | १*  *भावार्थः* यह आयत * आत्म-सम्मान औ tcर सीमाएं तय करने पर जोर देती है। नेक लोग फालतू की बहस या गाली-गलौज में अपना समय नष्ट नहीं करते, बल्कि अपने काम से काम रखते हैं और दूसरों लिए भी शांति की दुआ करते हैं। چ - ShareChat