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#🖋ग़ालिब की शायरी #📖 कविता और कोट्स✒️ #_alone_creator #🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️ #✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
🖋ग़ालिब की शायरी - मैं तुम्हारा ` रक्षक बन सकता हूं॰ पर तुम्हारा मालिक नहीं बन सकता। मैं तुम्हारे साथ चल सकता हूं॰. पर तुम्हारी राहें तय नहीं कर सकता। मैँ तुम्हें थाम लूंगा गिरने से पहले.. पर कभी उड़ने से नहीं रोक सकता। संदीप कुमार मैं तुम्हारा ` रक्षक बन सकता हूं॰ पर तुम्हारा मालिक नहीं बन सकता। मैं तुम्हारे साथ चल सकता हूं॰. पर तुम्हारी राहें तय नहीं कर सकता। मैँ तुम्हें थाम लूंगा गिरने से पहले.. पर कभी उड़ने से नहीं रोक सकता। संदीप कुमार - ShareChat