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ज़िन्दादिली से जो जिए कहते हैं उसे जीना, जिसको ग़मों की भी नही परवाह होती है । मायूसियों में वर्ना सभी आह ही भरतें हैं खुशियों की भला किसको नही चाह होती है ॥ #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 - ज़िन्दादिली से जो जिए कहते हैं उसे जीना, जिसे ग़मों की भी नही  परवाह होती है | मायूसियों में वर्ना सभी आह ही भरतें हैं खुशियों की भला किसको नही चाह होती है Il महेन्द्र नारायण ज़िन्दादिली से जियो ज़िन्दादिली से जो जिए कहते हैं उसे जीना, जिसे ग़मों की भी नही  परवाह होती है | मायूसियों में वर्ना सभी आह ही भरतें हैं खुशियों की भला किसको नही चाह होती है Il महेन्द्र नारायण ज़िन्दादिली से जियो - ShareChat