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#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - निकलते हैं आँसू जब मुलाकात नहीं होती, जब तुमसे कोई बात नहीं होती  तड़पता है दिल ख़ामोश रातें भी अब सवाल करने लगी हैं, क्यों मेरी ज़िंदगी में तेरी सौगात नहीं होती तेरी यादों का मौसम हर रोज़ बरसता है फिर भी इन आँखों से बरसात नहीं होती मैं ढूँढता रहा तुझे हर एक अजनबी चेहरे में , पर तेरी तरह कोई भी मुलाकात नहीं होती दिल की दीवारों पर बस तेरा ही नाम लिखा है, मगर तेरे नाम की कोई बात नहीं होती वो जो कहता था कभी साथ नहीं छूटेगा , आज उसके लबों पर वो बात नहीं होती निकलते हैं आँसू जब मुलाकात नहीं होती, जब तुमसे कोई बात नहीं होती तड़पता है दिल लिखित प्रकाश पंडित निकलते हैं आँसू जब मुलाकात नहीं होती, जब तुमसे कोई बात नहीं होती  तड़पता है दिल ख़ामोश रातें भी अब सवाल करने लगी हैं, क्यों मेरी ज़िंदगी में तेरी सौगात नहीं होती तेरी यादों का मौसम हर रोज़ बरसता है फिर भी इन आँखों से बरसात नहीं होती मैं ढूँढता रहा तुझे हर एक अजनबी चेहरे में , पर तेरी तरह कोई भी मुलाकात नहीं होती दिल की दीवारों पर बस तेरा ही नाम लिखा है, मगर तेरे नाम की कोई बात नहीं होती वो जो कहता था कभी साथ नहीं छूटेगा , आज उसके लबों पर वो बात नहीं होती निकलते हैं आँसू जब मुलाकात नहीं होती, जब तुमसे कोई बात नहीं होती तड़पता है दिल लिखित प्रकाश पंडित - ShareChat