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#📝कविता / शायरी/ चारोळी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - *मेरा तो खुशियां उधार देने का कारोबार था साहब. कोई वक्त पर लौटाता ही नहीं इसलिए घाटे में हूँ।* *मेरा तो खुशियां उधार देने का कारोबार था साहब. कोई वक्त पर लौटाता ही नहीं इसलिए घाटे में हूँ।* - ShareChat