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#महफ़िल-ए-शायरी 💔✍️ #✍️ अनसुनी शायरी #✍️अनकही दिल की बात
महफ़िल-ए-शायरी 💔✍️ - "कीमत पता हो जिसे पाने की, तभी तो खोने से डरता है। जो चीज़ आसानी से मिल जाए, उसकी कदर कौन करता 81" "कीमत पता हो जिसे पाने की, तभी तो खोने से डरता है। जो चीज़ आसानी से मिल जाए, उसकी कदर कौन करता 81" - ShareChat