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#✍️ विचार #✍️सुविचार #☺️उच्च विचार #☺चांगले विचार ✿•┅━꧁🌹सुप्रभात 🌹꧂━┅•✿ ✿ शनिवार दि. १८ एप्रिल २०२६✿ ✿वैशाख शु. प्रतिपदा शके १९४८✿ ✿ विक्रम सवत्सर २०८२ ✿ ✿ शिवशक ३५२ ✿ •••┈┅━❀꧁ ۩🌟۩ ꧂❀━┅┈••• ஜ۩۞۩ संस्कृत सुभाषितमाला ۩۞۩ஜ •••┈┅━❀꧁ ۩🌟۩ ꧂❀━┅┈••• अनर्थकं विप्रवासं गृहेभ्यः पापैः सन्धि परदाराभिमर्शम् । दम्भं स्तैन्य पैशुन्यं मद्यपानं न सेवते यश्च सुखी सदैव ॥ भावार्थ : जो व्यक्ति अकारण घर के बाहर नहीं रहता, बुरे लोगों की सोहबत से बचता है,परस्त्री से संबध नहीं रखता; चोरी, चुगली, पाखंड और नशा नहीं करता -वह सदा सुखी रहता है । ✿•••┈┅━꧁ ⚜️ ꧂━┅┈•••✿