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🙏 🌹 जय जय श्री राधे 🌹 🙏 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - 21:48 English श्रीमद्भागवत महापुराण (स्कन्ध १०, अध्याय यह वाक्यांश २, श्लोक २६) के गर्भस्तुति प्रसंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा নিম্] यह स्तुति देवताओं द्वारा भगवान (कृष्ण) की की ೯ रही है। जा श्लोकः सत्यव्रतं सत्यपरं त्रिसत्यं सत्यस्य योनिं निहितं च सत्ये। सत्यमृतसत्यनेत्रं सत्यात्मकं सत्यस्य त्वां शरणं प्रपन्नाः ।l वाक्यांश का अर्थ (सत्यस्य योनिं निहितं च सत्ये): सत्यस्य योनिंः जो सत्य के भी मूल कारण (उत्पत्ति स्थान) हैं। निहितं च सत्येः जो स्वयं सत्य के भीतर ही स्थित हैं (अर्थात सत्य ही जिनका आधार है) । Online Vedabase +2 तात्पर्यः यहाँ भगवान को परम सत्य कहा गया है। इसका अर्थ है कि वे सत्य की उत्पत्ति के स्थान हैं और सत्य में ही समाए हुए हैं। वे ही परम सत्य हैं, जो सृष्टि के पूर्व, वर्तमान और अंत में भी विद्यमान हैं। Online Vedabase +1 श्लोक का भावः सम्पूर्ण  "हम उस भगवान की शरण में हैं जो सत्यव्रत (सत्य ही व्रत जिनका) हैं, जो सत्यपर (सत्य के परायण) हैं, जो त्रिसत्य (तीनों कालों - भूत, वर्तमान, भविष्य में सत्य) हैं, जो सत्य की भी योनि (उत्पत्ति-स्थान) हैं॰ जो सत्य में निहित हैं, जो सत्य के भी सत्य हैं और सत्य के ही स्वरूप हैं"। 21:48 English श्रीमद्भागवत महापुराण (स्कन्ध १०, अध्याय यह वाक्यांश २, श्लोक २६) के गर्भस्तुति प्रसंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा নিম্] यह स्तुति देवताओं द्वारा भगवान (कृष्ण) की की ೯ रही है। जा श्लोकः सत्यव्रतं सत्यपरं त्रिसत्यं सत्यस्य योनिं निहितं च सत्ये। सत्यमृतसत्यनेत्रं सत्यात्मकं सत्यस्य त्वां शरणं प्रपन्नाः ।l वाक्यांश का अर्थ (सत्यस्य योनिं निहितं च सत्ये): सत्यस्य योनिंः जो सत्य के भी मूल कारण (उत्पत्ति स्थान) हैं। निहितं च सत्येः जो स्वयं सत्य के भीतर ही स्थित हैं (अर्थात सत्य ही जिनका आधार है) । Online Vedabase +2 तात्पर्यः यहाँ भगवान को परम सत्य कहा गया है। इसका अर्थ है कि वे सत्य की उत्पत्ति के स्थान हैं और सत्य में ही समाए हुए हैं। वे ही परम सत्य हैं, जो सृष्टि के पूर्व, वर्तमान और अंत में भी विद्यमान हैं। Online Vedabase +1 श्लोक का भावः सम्पूर्ण  "हम उस भगवान की शरण में हैं जो सत्यव्रत (सत्य ही व्रत जिनका) हैं, जो सत्यपर (सत्य के परायण) हैं, जो त्रिसत्य (तीनों कालों - भूत, वर्तमान, भविष्य में सत्य) हैं, जो सत्य की भी योनि (उत्पत्ति-स्थान) हैं॰ जो सत्य में निहित हैं, जो सत्य के भी सत्य हैं और सत्य के ही स्वरूप हैं"। - ShareChat