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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - मेरे हिस्से में शायद कभी हक़ आया ही नहीं, मैं हर बार बस फ़र्ज़ निभाती रह गई.. सबकी खुशी , सबकी ज़़रूरत, सबका साथ निभाया मैंने... पर जब बात मेरी आई, तो खुद को हमेशा पीछे पाती रही. fag: जीती रही, मैं अपनों के और धीरे धीरे खुद से दूर होती गई. शायद किस्मत ने मुझे चाहत नहीं , सिर्फ जिम्मेदारियाँ लिखी थीं.. इसलिए हर बार दिल को मारकर भी मैं मुस्कुराती रह गई.. मेरे हिस्से में शायद कभी हक़ आया ही नहीं, मैं हर बार बस फ़र्ज़ निभाती रह गई.. सबकी खुशी , सबकी ज़़रूरत, सबका साथ निभाया मैंने... पर जब बात मेरी आई, तो खुद को हमेशा पीछे पाती रही. fag: जीती रही, मैं अपनों के और धीरे धीरे खुद से दूर होती गई. शायद किस्मत ने मुझे चाहत नहीं , सिर्फ जिम्मेदारियाँ लिखी थीं.. इसलिए हर बार दिल को मारकर भी मैं मुस्कुराती रह गई.. - ShareChat