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जब गलत नहीं हो तो क्यो सहना है जुल्म घुट घुट के जीने से अच्छा है आवाज उठाओ अरे एक तरफ रख दो संस्कार जब बात सही गलत की और स्वाभिमान की हो जो जैसा आपके के साथ पेश आए वैसा हीं व्योहार दो क्या इतनी कमजोर हो तुम जो खुद के लिए जी नहीं सकती जिसके लिए मर जाती वो कल को छूट के दूसरा घर बसाएगा तुम्हारे जाने से उसके जीवन में कोई कमी नहीं आएगी तुम्हारे जाते हीं वो कही और दिल लाएगा पढ़ लिख कर भी इतनी कमजोर है नारी अपने हक के लिए क्यो नहीं बोलती है नारी #☝ मेरे विचार
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