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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं सिंधु बंदउँ गुरु पद कंज कृपा नररूप हरि महामोह तम पुंज जासु बचन रवि कर निकर मैं उन गुरु के चरण कमलों की वंदना करता हूँ॰ जो कृपा के सागर और मनुष्य रूप में भगवान हैं। जिनके वचन सूर्य की किरणों के समान हैं, जो अज्ञान रूपी अंधकार का नाश कर देते हैं, अर्थात श्रीराम जी तक पहुँचने का मार्ग गुरु की कृपा और ज्ञान से प्रशस्त होता है। हरि शरणं सिंधु बंदउँ गुरु पद कंज कृपा नररूप हरि महामोह तम पुंज जासु बचन रवि कर निकर मैं उन गुरु के चरण कमलों की वंदना करता हूँ॰ जो कृपा के सागर और मनुष्य रूप में भगवान हैं। जिनके वचन सूर्य की किरणों के समान हैं, जो अज्ञान रूपी अंधकार का नाश कर देते हैं, अर्थात श्रीराम जी तक पहुँचने का मार्ग गुरु की कृपा और ज्ञान से प्रशस्त होता है। - ShareChat