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#📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार
📒 मेरी डायरी - kousar चल ढूंड लेते है सुकून ऐ ज़िंदगी, बेचैनियों की कतार बहुत है मुस्कुरा लेते है दो पल रुक के, ज़िम्मेदारियो के पहाड़ बहुत है कुछ दूर ही सही कुछ दोस्त कुछ हमसफ़र সাথ নী বল जो कभी अपने थे अब गैर बन बैठे है, बदलने वालो की भरमार बहत है। य kousar चल ढूंड लेते है सुकून ऐ ज़िंदगी, बेचैनियों की कतार बहुत है मुस्कुरा लेते है दो पल रुक के, ज़िम्मेदारियो के पहाड़ बहुत है कुछ दूर ही सही कुछ दोस्त कुछ हमसफ़र সাথ নী বল जो कभी अपने थे अब गैर बन बैठे है, बदलने वालो की भरमार बहत है। य - ShareChat