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#✨गुड नाईट शायरी #🌙 गुड नाईट #✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✨गुड नाईट शायरी - कीज़्थें ैकीरे पे झुकी थी नूर था. जालिम की सादगी में भी कितना गुरूर 94[[ Goodnight अब खूद को सम्भालते भी तो 4 बेचैन थी आंखे और दिल मजबूर था कीज़्थें ैकीरे पे झुकी थी नूर था. जालिम की सादगी में भी कितना गुरूर 94[[ Goodnight अब खूद को सम्भालते भी तो 4 बेचैन थी आंखे और दिल मजबूर था - ShareChat