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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - बेचैन बेक़रार क्यूँ हैं? इतने इतने लोग ज़रूरत से ज़्यादा होशियार क्यूँ हैं? सब को सबकी हर खबर चाहिए सब चलते फिरते अख़बार क्यूँ हैं? बेचैन बेक़रार क्यूँ हैं? इतने इतने लोग ज़रूरत से ज़्यादा होशियार क्यूँ हैं? सब को सबकी हर खबर चाहिए सब चलते फिरते अख़बार क्यूँ हैं? - ShareChat