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कबीर परमेश्वर केवल कलियुग में ही नहीं आए, बल्कि वे चारों युगों में प्रकट होते हैं। महाभारत युद्ध के उपरांत पांडवों ने श्रीकृष्ण जी के सान्निध्य में जो धर्म यज्ञ किया था, उसे परमात्मा कबीर जी ने अपने भक्त सुपच सुदर्शन के रूप में आकर पूर्ण करवाया था: बज्या सुपच का शंख, स्वर्ग में धुनि सुनि। गण गंधर्व गलतान, सकल ज्ञानी गुनी।। #🙏 ਕਰਮ ਕੀ ਹੈ ❓
🙏 ਕਰਮ ਕੀ ਹੈ ❓ - परमात्मा चारों युगों में आते हैं बदीछाड रतगुर रागणाल जी महाराज की पावन उपस्थिति में ६२१ नां दिवसु कबारपसुश्वरप्रकट २९ जून २०२६ में अलग-्अलग नामों से आते हैं। कबीर परमात्मा चारों  युगों  'कबीर सागर' (बोध सागर खंड) के अध्याय 'भवतारण बोध' , पृष्ठ ५५ में कबीर जी ने स्वयं बताया हैः टेरा, त्रेता नाम मुनीन्द्र मेरा। सतयुग में सतसुकृत कह द्वापर में करुणामय कहाया, कलयुग नाम कबीर धराया।। Sant Rampal Ji YOUTUBE Maharaj CHANNEL @SaintRampalJiMaharaj परमात्मा चारों युगों में आते हैं बदीछाड रतगुर रागणाल जी महाराज की पावन उपस्थिति में ६२१ नां दिवसु कबारपसुश्वरप्रकट २९ जून २०२६ में अलग-्अलग नामों से आते हैं। कबीर परमात्मा चारों  युगों  'कबीर सागर' (बोध सागर खंड) के अध्याय 'भवतारण बोध' , पृष्ठ ५५ में कबीर जी ने स्वयं बताया हैः टेरा, त्रेता नाम मुनीन्द्र मेरा। सतयुग में सतसुकृत कह द्वापर में करुणामय कहाया, कलयुग नाम कबीर धराया।। Sant Rampal Ji YOUTUBE Maharaj CHANNEL @SaintRampalJiMaharaj - ShareChat