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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #❤️सैड व्हाट्सएप स्टेटस #🌙 गुड नाईट #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍प्रेमचंद की कहानियां
✍मेरे पसंदीदा लेखक - वक्त नहीं है सुबह से शाम हो गई नजर नहीं आ रहा 1٥ अब तक दरख़्त नहीं कटा है कि मेरे पास आरे अपने आरे की धरी की धार तेज करने तेज कर लो. का वक्त नहीं है 6 PM 6 AM एक लकड़हारा आरे से दरख़्त काट रहा था। कुंद आरे की वजह से दरख़्त कटने का नाम नहीं ले रहा था। 1 घंटे का काम था मगर अब १० घंटे गुजर गए और लकड़हारा हिमत हारने का था। किसी गुजरने वाले ने कहा, " सुबह से शाम गई तक दरख़्त नहीं कटा! अपने आरे की धरी तेज कर लो. " तो लकड़हारे ने गुजरने वाले को घूर कर देखा और दुरुस्त लहजे में कहा, * नजर नहीं आ रहा है कि मेरे पास आरे की धार तेज करने का वक्त नहीं है!  सबकः शदीद मेहनत के बाद भी रिजल्ट अच्छा न मिल रहा हो तो अपनी महारत को जांचना चाहिए। (मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया) वक्त नहीं है सुबह से शाम हो गई नजर नहीं आ रहा 1٥ अब तक दरख़्त नहीं कटा है कि मेरे पास आरे अपने आरे की धरी की धार तेज करने तेज कर लो. का वक्त नहीं है 6 PM 6 AM एक लकड़हारा आरे से दरख़्त काट रहा था। कुंद आरे की वजह से दरख़्त कटने का नाम नहीं ले रहा था। 1 घंटे का काम था मगर अब १० घंटे गुजर गए और लकड़हारा हिमत हारने का था। किसी गुजरने वाले ने कहा, " सुबह से शाम गई तक दरख़्त नहीं कटा! अपने आरे की धरी तेज कर लो. " तो लकड़हारे ने गुजरने वाले को घूर कर देखा और दुरुस्त लहजे में कहा, * नजर नहीं आ रहा है कि मेरे पास आरे की धार तेज करने का वक्त नहीं है!  सबकः शदीद मेहनत के बाद भी रिजल्ट अच्छा न मिल रहा हो तो अपनी महारत को जांचना चाहिए। (मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया) - ShareChat