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#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - अगर कोई व्यक्ति अपने मां-बाप की सेवा नहीं करता, दुर्व्यवहार करता है अथवा असहाय अवस्था में उनका त्याग कर देता है तो निश्चय ही वह घृणा का पात्र होता है क्योंकि वह कभी उनका ऋण नहीं चुका सकता ! मातृभूमि का होता लेकिन माता-पिता से भी बड़ा ऋण है! अतः स्वदेश मे पल ्बढ कर,शिक्षा प्राप्त कर लेने के बाद स्वराष्ट्र को दयनीय स्थिति में छोड़़, लालच मे पड़कर विदेश को समृद्ध बनाना कहीं अधिक निंदनीय ಈ! अगर कोई व्यक्ति अपने मां-बाप की सेवा नहीं करता, दुर्व्यवहार करता है अथवा असहाय अवस्था में उनका त्याग कर देता है तो निश्चय ही वह घृणा का पात्र होता है क्योंकि वह कभी उनका ऋण नहीं चुका सकता ! मातृभूमि का होता लेकिन माता-पिता से भी बड़ा ऋण है! अतः स्वदेश मे पल ्बढ कर,शिक्षा प्राप्त कर लेने के बाद स्वराष्ट्र को दयनीय स्थिति में छोड़़, लालच मे पड़कर विदेश को समृद्ध बनाना कहीं अधिक निंदनीय ಈ! - ShareChat