ShareChat
click to see wallet page
search
#✍️ अनसुनी शायरी
✍️ अनसुनी शायरी - व्यक्ति बनकर नहीं, बल्कि व्यक्तित्व बनकर जिओ क्योंकि वक्त एक दिन विदा हो जाता है, लेकिन व्यक्तित्व हमेशा जीवित रहता है. ७७० व्यक्ति बनकर नहीं, बल्कि व्यक्तित्व बनकर जिओ क्योंकि वक्त एक दिन विदा हो जाता है, लेकिन व्यक्तित्व हमेशा जीवित रहता है. ७७० - ShareChat