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तलब चाहे दर्द की हो या चाय की बेहिसाब होती है लोग चुस्की में चाय पीते हैं और हम सिप सिप करके गमों का मज़ा लेते हैं चाय कड़क होती है तो हर थकान उतर जाती हैं गम रंग लेते हैं तो हद हर एक खत्म होती है चाय की गर्माहट जहां दर्द खींच लेती है गमों की गर्मियां भी अश्क सोख लेती है मै चाय और ग़मों से बराबर का इश्क़ रखती हूं चाय के कप संग में गमों की राख रखती हूं। Saba Parveen दिल से दिल तक ❤️🧡❤️🧡 #💓 मोहब्बत दिल से
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