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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - पुनश्च भूयाद्भगवत्यनन्ते रतिः प्रसङ्गश्च तदाश्रयेषु।  मैत्र्यस्तु  महत्सु यां यामुपयामि सृष्टिं सर्वत्र नमो द्विजेभ्यः ।। मैनी आचार्य राजा परीक्षित कहते हैं  मैं आप ब्राह्मणोंके चरणोंमें हूँ कि मुझे प्रणाम करके पुनः यहो प्रार्थना करता कर्मवश चाहे जिस योनितमें जन्म लेना पडे़ भगवान श्रीकृष्णके चरणोंमें मेरा अनुराग हो, उनके चरणाश्रित महात्माओंसे विशेष प्रीति हो और जगतके प्राणियोंसे मेरी एक॰सी मैत्री रहे। ऐसा आप आशीर्वाद दीजिये। पुनश्च भूयाद्भगवत्यनन्ते रतिः प्रसङ्गश्च तदाश्रयेषु।  मैत्र्यस्तु  महत्सु यां यामुपयामि सृष्टिं सर्वत्र नमो द्विजेभ्यः ।। मैनी आचार्य राजा परीक्षित कहते हैं  मैं आप ब्राह्मणोंके चरणोंमें हूँ कि मुझे प्रणाम करके पुनः यहो प्रार्थना करता कर्मवश चाहे जिस योनितमें जन्म लेना पडे़ भगवान श्रीकृष्णके चरणोंमें मेरा अनुराग हो, उनके चरणाश्रित महात्माओंसे विशेष प्रीति हो और जगतके प्राणियोंसे मेरी एक॰सी मैत्री रहे। ऐसा आप आशीर्वाद दीजिये। - ShareChat