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#✨WhatsApp शायरी🖤 #✨हमार विचार
✨WhatsApp शायरी🖤 - मंडप में बैठी थी तो किसी की बुआ, किसी की दीदी किसी की मौसी॰ किसी की प्रेमिका और सबसे बढ़कर पापा की छोटी सी बेटी थी। भी थी॰ शोर भी था हँसी पर दिल कहीं चुप-चुप सा था. फेरे लेकर उठी, Ua की बहू तो किसी की पत्नी॰ किसी किसी की भाभी किसी की चाची बन गई और उसी भीड़ में खडे खड़े मैंने खुद ' को बदलते देखा. उस पल समझ आया- कि विदाई सिर्फ घर की नहीं होती बचपन की भी होती है.. 3iR # अपना एक हिस्सा वहीं छोड़ आई. Poetrynook / मंडप में बैठी थी तो किसी की बुआ, किसी की दीदी किसी की मौसी॰ किसी की प्रेमिका और सबसे बढ़कर पापा की छोटी सी बेटी थी। भी थी॰ शोर भी था हँसी पर दिल कहीं चुप-चुप सा था. फेरे लेकर उठी, Ua की बहू तो किसी की पत्नी॰ किसी किसी की भाभी किसी की चाची बन गई और उसी भीड़ में खडे खड़े मैंने खुद ' को बदलते देखा. उस पल समझ आया- कि विदाई सिर्फ घर की नहीं होती बचपन की भी होती है.. 3iR # अपना एक हिस्सा वहीं छोड़ आई. Poetrynook / - ShareChat