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#कविताएं #💔दर्द कवित#दर्द कविताएं #कविता #मेरी कविता#मेरी कविता
कविताएं - मत पूछ इस जिंदगी में बेगाने होते लोग देखे अजनबी होता शहर देखा  हर इंसान को यहाँ मैंने खुद से ही बेखबर देखा। रोते हुए नयन देखे मुस्कुराता हुआ अधर देखा गैरों के हाथों में मरहम, अपनों के 706 27/ हाथों मत पूछ इस जिंदगी में , इन आँखों ने क्या मंजर देखा मैने हर इंसान को यहाँ, खुद से ही बेखबर देखा। बस मत पूछ इस जिंदगी में बेगाने होते लोग देखे अजनबी होता शहर देखा  हर इंसान को यहाँ मैंने खुद से ही बेखबर देखा। रोते हुए नयन देखे मुस्कुराता हुआ अधर देखा गैरों के हाथों में मरहम, अपनों के 706 27/ हाथों मत पूछ इस जिंदगी में , इन आँखों ने क्या मंजर देखा मैने हर इंसान को यहाँ, खुद से ही बेखबर देखा। बस - ShareChat