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Osho #ओशो #ओशो #osho #osho #ओशो विचार
osho - सौंदर्य से उपभोग तक नग्नता नग्नता अपने मूल अर्थ में कभी केवल शरीर का प्रदर्शन नहीं थी। वह अस्तित्व की सबसे सच्ची॰ सरल और निर्वस्त्र अभिव्यक्ति थी। वह अवस्था थी जहाँ मनुष्य किसी भी आवरण, किसी भी वह मुखौटे किसी भी बनावट और दिखावे से मुक्त होकर মামাতিক্ধ अपने वास्तविक स्वरूप में उपस्थित होता था। उसमें न छल था॰ न केवल सहजता. स्वाभाविकता और... पाखंड न आडंबर 37} 9چ सौंदर्य से उपभोग तक नग्नता नग्नता अपने मूल अर्थ में कभी केवल शरीर का प्रदर्शन नहीं थी। वह अस्तित्व की सबसे सच्ची॰ सरल और निर्वस्त्र अभिव्यक्ति थी। वह अवस्था थी जहाँ मनुष्य किसी भी आवरण, किसी भी वह मुखौटे किसी भी बनावट और दिखावे से मुक्त होकर মামাতিক্ধ अपने वास्तविक स्वरूप में उपस्थित होता था। उसमें न छल था॰ न केवल सहजता. स्वाभाविकता और... पाखंड न आडंबर 37} 9چ - ShareChat