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#✍️ साहित्य एवं शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📓 हिंदी साहित्य #📗प्रेरक पुस्तकें📘
✍️ साहित्य एवं शायरी - भी अब थक सी गई है, प्रकृति हर रोज किसी न किसी दर्द को guId- guIdI पेड़ों की खामोशी चीखती है, वाला कोई नहीं होता। सुनने पर बारिश भी आज दिल खोलकर नहीं बरसी , शायद उसे भी अपने दर्द का डर है।। धुंध में खो गया है हर रास्ता , जैसे जिंदगी ने उम्मीदें ही छुपा ली हों। ) रात की तन्हाई में चाँद भी रोता है, बस उसके आँसू कोई देख नहीं पाता। हवा का हर झोंका एक सवाल करता है, क्यों खुशियाँ इतनी जल्दी 1 छूट जाती हैं? লস্ত্রক PANKAU KUNAR SHAKYI भी अब थक सी गई है, प्रकृति हर रोज किसी न किसी दर्द को guId- guIdI पेड़ों की खामोशी चीखती है, वाला कोई नहीं होता। सुनने पर बारिश भी आज दिल खोलकर नहीं बरसी , शायद उसे भी अपने दर्द का डर है।। धुंध में खो गया है हर रास्ता , जैसे जिंदगी ने उम्मीदें ही छुपा ली हों। ) रात की तन्हाई में चाँद भी रोता है, बस उसके आँसू कोई देख नहीं पाता। हवा का हर झोंका एक सवाल करता है, क्यों खुशियाँ इतनी जल्दी 1 छूट जाती हैं? লস্ত্রক PANKAU KUNAR SHAKYI - ShareChat