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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - ( हिन्दू ने हिन्दू को मारा हो अदालत जाइए तो कुछ और दलितों को ले दे के बस निपटाइए कूँ तो बुल्छोज़ारदचल्हने भी कुछ आदाब हैं हाँ मगर क़ातिल कोई मुल्ला हो तो ले आइये 55 -अस्तित्व अंकुर ' ( हिन्दू ने हिन्दू को मारा हो अदालत जाइए तो कुछ और दलितों को ले दे के बस निपटाइए कूँ तो बुल्छोज़ारदचल्हने भी कुछ आदाब हैं हाँ मगर क़ातिल कोई मुल्ला हो तो ले आइये 55 -अस्तित्व अंकुर ' - ShareChat