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#📜 શાયરી #✍🏻 ગુજરાતી કવિતા 📜
📜 શાયરી - "्बात गहरी है , दुबारा पढ़ो २१" हवाएं माफ़ी मोंग भी ले तो क्या, टूटी हुई टहनी तो टूटी ही रहती हे "्बात गहरी है , दुबारा पढ़ो २१" हवाएं माफ़ी मोंग भी ले तो क्या, टूटी हुई टहनी तो टूटी ही रहती हे - ShareChat