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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - (हाय क्या शायरी है ४) लूट कर मेरी दुनिया वो मुझे ही दिलासा देते हैं कातिल मेरे मुझे ही जीने का हौसला देते हैं केसी ये रीत हे ज़माने की॰ए दोस्त जो ज़हर देते रहै वही फिर दवा देते है॰ [ .10 (हाय क्या शायरी है ४) लूट कर मेरी दुनिया वो मुझे ही दिलासा देते हैं कातिल मेरे मुझे ही जीने का हौसला देते हैं केसी ये रीत हे ज़माने की॰ए दोस्त जो ज़हर देते रहै वही फिर दवा देते है॰ [ .10 - ShareChat