🚨 बड़ी खबर : 😡 अबे पैसों पर बिकने वाले भांडों! क्या हर मुद्दे पर आवाज़ उठाने का पैमाना अलग-अलग होना चाहिए? झारखंड में भी छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या हर विरोध प्रदर्शन को समान महत्व मिलना चाहिए, या कुछ मुद्दों पर ही अधिक चर्चा होती है? लोकतंत्र में किसी भी नागरिक या छात्र को अपनी बात शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से रखने का अधिकार है। इसी तरह सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के बयान और उनकी चुप्पी—दोनों पर सवाल पूछना भी लोकतांत्रिक चर्चा का हिस्सा है। इस पोस्ट का उद्देश्य यही सवाल उठाना है कि यदि किसी मुद्दे पर समर्थन दिया जाता है, तो क्या अन्य समान परिस्थितियों में भी वही संवेदनशीलता और सक्रियता दिखाई जानी चाहिए? आपकी क्या राय है? अपनी बात कमेंट में ज़रूर लिखें। #📹 ट्रेंडिंग वीडियो #🗞️पॉलिटिकल अपडेट #📹शॉर्ट अपडेट्स वीडियो 🎥 #🎞️आज के वायरल अपडेट्स #🌐 राष्ट्रीय अपडेट
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