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#✍️ जीवन में बदलाव
✍️ जीवन में बदलाव - मेरी लेखनी जब तुम होती हो, मैं समझ पाती हूँ अपने स्वतंत्र भावों को समझ पाती हूँ, दुनिया की बंदिशों को जब तुम होती हो.. सारे गिले शिकवे, समझ पाती हूँ दुनिया के, जब तुम होती हो. मेरे अल्फ़ाज़ बरस पडते हैं उन दस्तूरों पर जो, HIH बिना इजाज़त हम पर लगा दिये गये, क्योंकि जब तुम होती हो.. मेरी खामोशी को भी एक जुबां मिल जाती है। मेरी लेखनी जब तुम होती हो, मैं समझ पाती हूँ अपने स्वतंत्र भावों को समझ पाती हूँ, दुनिया की बंदिशों को जब तुम होती हो.. सारे गिले शिकवे, समझ पाती हूँ दुनिया के, जब तुम होती हो. मेरे अल्फ़ाज़ बरस पडते हैं उन दस्तूरों पर जो, HIH बिना इजाज़त हम पर लगा दिये गये, क्योंकि जब तुम होती हो.. मेरी खामोशी को भी एक जुबां मिल जाती है। - ShareChat