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✍️ अनसुनी शायरी - के मोहताज नहीं होते क्योंकि कोई तजुर्बे उम्र बूढ़ापे तक भी नासमझ रहा तो किसी ने बचपन में ही दुनिया परख ली... के मोहताज नहीं होते क्योंकि कोई तजुर्बे उम्र बूढ़ापे तक भी नासमझ रहा तो किसी ने बचपन में ही दुनिया परख ली... - ShareChat