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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 11 WUNDN कबीर साकट का मुख बिंब है, निकसत बचन भुवंग। ताकी औषधि मौन है विष नहिं व्यापै अंग।। निगुरा कबीर साहेब जी कहते हैं कि साकट अर्थात का मुख बिल के समान है और उसमें से उसके कठोर तीखे वचन सर्प की भांति निकलते हैं। उसकी औषधि केवल मौन रहना है इससे शरीर में उसके तीखे ्वचनों का विष नहीं व्यापेगा। SatlokAshramMundkaoffcial SADelhiMundka Satlok AshramMundka 11 WUNDN कबीर साकट का मुख बिंब है, निकसत बचन भुवंग। ताकी औषधि मौन है विष नहिं व्यापै अंग।। निगुरा कबीर साहेब जी कहते हैं कि साकट अर्थात का मुख बिल के समान है और उसमें से उसके कठोर तीखे वचन सर्प की भांति निकलते हैं। उसकी औषधि केवल मौन रहना है इससे शरीर में उसके तीखे ्वचनों का विष नहीं व्यापेगा। SatlokAshramMundkaoffcial SADelhiMundka Satlok AshramMundka - ShareChat