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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #episodic
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - हरदेव वाणी हरदैव सिँह जी महाराज ٧٩٧ हरदेव सिंह जी নানা हरदेव सिंह (निरंकारी बाबा, भोला बाबा ) पूरा नाम बाबा जन्म - २३ फरवरी 7९५४ সম্মলীন - 13 মন 2016  पत्नी सविन्दर हरदेव कोर बाबा गुरुबचन सिंह पिता সানা  कुलवत कौर माता दिल्ली जन्म स्थान संत निरंकारी मिशन के प्रमुख  हरदेव सिंह সালা எ[1 गुरु हा समिरण गुरुही पूजा गुरु 07|7- (1980-२०1६), अध्यात्मिक सद्गुरु गुरु ही ह जगदीश्वर साधो ओर गुरु परमेश्वर है। पापयनाशक ध्म का रक्षक सतगुरु सच का पालक:ी कष निवारक पीड़ा नाशाक सनगुरु का नायक ह। Dhan Nirankar ji शात रचरूपा आनररूपा सनगुर करुणा सापर ह। की कृपा से होनी जान की ज्योन उजागर ऐ। -5]9 सनगरु सक्का हितकारी सतगुरु मृुक्ति दाता हे। भवसागर से जीयन नेया स्तगुरु पार लगाता ह। सच्न मन से ओर लगन से जो सतगुरु को ध्यायेगा। ^ क्ह ' हरदच' चनी जनजग मे चार पायगा। VEಭ १३ मई सब पूछ रहे है  १३ मईको इसबार क्या करना है, सत्संग करनी है? सेवा करनी हे? या को, तेरे चरणों में झुक जाना, सुमिरन करना है? பி मिटा कर अपनी यही है भक्ति की मंजिल, यही है सच्चा नजराना।  की खुशबू से॰ महके सारा जीवन हमारा, वाबा के वचनों सनगुरु कह रहा हरबस यो सतगुरु के चरणों में ही मिलता, हर কহনী কী কিনাো] करना है जो मानवता का डूवती  पर करें प्रतिज्ञा, मानवता की सेवा करेंगे , दिवस समर्पण  पढा कर मसीहा ३६ ; মাল নক্ধ' प्यार और नम्नता के रंगों से॰ दुनिया का ऑगन भरेंगे।  ओरचो हे I4I दिया तो कर समर्पण समर्पण   सत्संग तो सांस सेवा , सुमिरन, सांस में होने लगेगा , हरदेव वाणी हरदैव सिँह जी महाराज ٧٩٧ हरदेव सिंह जी নানা हरदेव सिंह (निरंकारी बाबा, भोला बाबा ) पूरा नाम बाबा जन्म - २३ फरवरी 7९५४ সম্মলীন - 13 মন 2016  पत्नी सविन्दर हरदेव कोर बाबा गुरुबचन सिंह पिता সানা  कुलवत कौर माता दिल्ली जन्म स्थान संत निरंकारी मिशन के प्रमुख  हरदेव सिंह সালা எ[1 गुरु हा समिरण गुरुही पूजा गुरु 07|7- (1980-२०1६), अध्यात्मिक सद्गुरु गुरु ही ह जगदीश्वर साधो ओर गुरु परमेश्वर है। पापयनाशक ध्म का रक्षक सतगुरु सच का पालक:ी कष निवारक पीड़ा नाशाक सनगुरु का नायक ह। Dhan Nirankar ji शात रचरूपा आनररूपा सनगुर करुणा सापर ह। की कृपा से होनी जान की ज्योन उजागर ऐ। -5]9 सनगरु सक्का हितकारी सतगुरु मृुक्ति दाता हे। भवसागर से जीयन नेया स्तगुरु पार लगाता ह। सच्न मन से ओर लगन से जो सतगुरु को ध्यायेगा। ^ क्ह ' हरदच' चनी जनजग मे चार पायगा। VEಭ १३ मई सब पूछ रहे है  १३ मईको इसबार क्या करना है, सत्संग करनी है? सेवा करनी हे? या को, तेरे चरणों में झुक जाना, सुमिरन करना है? பி मिटा कर अपनी यही है भक्ति की मंजिल, यही है सच्चा नजराना।  की खुशबू से॰ महके सारा जीवन हमारा, वाबा के वचनों सनगुरु कह रहा हरबस यो सतगुरु के चरणों में ही मिलता, हर কহনী কী কিনাো] करना है जो मानवता का डूवती  पर करें प्रतिज्ञा, मानवता की सेवा करेंगे , दिवस समर्पण  पढा कर मसीहा ३६ ; মাল নক্ধ' प्यार और नम्नता के रंगों से॰ दुनिया का ऑगन भरेंगे।  ओरचो हे I4I दिया तो कर समर्पण समर्पण   सत्संग तो सांस सेवा , सुमिरन, सांस में होने लगेगा , - ShareChat