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#ब्रेकिंग न्यूज़🙏 - वाजिब कारण बिना पति से अलग रहने पर भरण-्पोषण का हक नहीं रंची, विशेष संवाददाता | झारखंड हाईकोर्ट नेनिचली अदालत के आदेश कोकिया रद्द हाइकोट ने एक आदेश में कहा हे कि॰ फमिली को्ट के फसले के खिलाफ अमित  নিনা ক্িমী নানিন ক্াতে ক্র পনি ম ने हाईको्ट गे अपीत दायर की  सुनवाई  क अलग रहने वाली पल्नी पतिःसे भरणन दारान हाईकोर्टने दोनो प्क्षो सेजवाव मागा पोपण की हकदार नही है। ओरसाक्ष्य पेश करने का निदेश दिया। जस्टिस सृभाप चंद की अदालत ने सभी साक्ष्यदेखने के वाद अदालतने कही फैसला देते हुए कहा कि इस मामले  यह কি ভম মামল ম এলী কী থা ৭ কs में कोट के समक्ष जोभी साक्ष्य पेश ऐसा साष्य पेश नही कियागया ६ निसस यहपताचत कि वह प्ति कसाय किए गए हें उसमें ऐसा कुछ नहों है परेशान हःया उसके परिजन उसे परेशान कररहे ह।गर्भवस्था के दारान पल्ीने নিমম এনা বল ক্ি এলী ক্রা এনি ম जोआरोपलगए हेओरउसके समर्थनगजो साक्ष्य उपलव् कराएगए ह वह  होने का ठोस कोई कारण हे। विरोवाभास सभरह।पली विना किसी वाजिव कारण के पति स अलग रह रही ह। সলেযা ऐसे में पत्नी को भरण पोषण के लिए ऐसे मेउसे भरण - पोषण के लिए राशि नही मित सकती आर वह इसकी हकदार भत्ता पाने का आधकार नहीं हे। इस  नही हे।इसके सायही अदालतनेनिवती अदातत के आदेश कोशी रद्द करदिया  निर्देश के साथ ही अदालत ने फेमिली  उसके खिलाफ पत्नी ने जोभी आरोप अक्तूबर २०१ ७ से पल्नी को हर गाह को्ट क उस आदेश कोमी रद्दकर f, নিমস পনি ক্ষা ব েসান্ক 15 १५ हजार रुपय भरण पापण केलिए लगाए हे बह उचित नही हे। उसने अपनी मजी सेघर छोड़ा हे।इसके बाद हजार रुपय भरण पाोपण के लिएपली देने का निर्देश दिया था। पति को ओर পলীনমানী কদদিলীক্ীৎস মতো- को देने का निर्देश दिया गया था। से अदालत को बताया गया किःशादी इस संबंघ में पति अमित कच्छप ने पोषण के लिए आवेदन दिया। इस पर बादसेहीःपल्नी ने प्ति  के ক্রম্ত নিনী सुनवाई के बाद फेमिली कोरट ने पति हाईकोट में याचिका दायर कर रांची  काघर छोड़ दिया था। वहहर बार फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती दी  ক্িমা ন কিমী মৈপ স নঙ্ানা ননান  कोहर माह १५ हजार रुपय भरण थी। फेमिली कोट ने पति को ३० लगी। प्ति की ओरसेबताया गया कि॰ पोषण केलिए देने का निर्देश दिया। वाजिब कारण बिना पति से अलग रहने पर भरण-्पोषण का हक नहीं रंची, विशेष संवाददाता | झारखंड हाईकोर्ट नेनिचली अदालत के आदेश कोकिया रद्द हाइकोट ने एक आदेश में कहा हे कि॰ फमिली को्ट के फसले के खिलाफ अमित  নিনা ক্িমী নানিন ক্াতে ক্র পনি ম ने हाईको्ट गे अपीत दायर की  सुनवाई  क अलग रहने वाली पल्नी पतिःसे भरणन दारान हाईकोर्टने दोनो प्क्षो सेजवाव मागा पोपण की हकदार नही है। ओरसाक्ष्य पेश करने का निदेश दिया। जस्टिस सृभाप चंद की अदालत ने सभी साक्ष्यदेखने के वाद अदालतने कही फैसला देते हुए कहा कि इस मामले  यह কি ভম মামল ম এলী কী থা ৭ কs में कोट के समक्ष जोभी साक्ष्य पेश ऐसा साष्य पेश नही कियागया ६ निसस यहपताचत कि वह प्ति कसाय किए गए हें उसमें ऐसा कुछ नहों है परेशान हःया उसके परिजन उसे परेशान कररहे ह।गर्भवस्था के दारान पल्ीने নিমম এনা বল ক্ি এলী ক্রা এনি ম जोआरोपलगए हेओरउसके समर्थनगजो साक्ष्य उपलव् कराएगए ह वह  होने का ठोस कोई कारण हे। विरोवाभास सभरह।पली विना किसी वाजिव कारण के पति स अलग रह रही ह। সলেযা ऐसे में पत्नी को भरण पोषण के लिए ऐसे मेउसे भरण - पोषण के लिए राशि नही मित सकती आर वह इसकी हकदार भत्ता पाने का आधकार नहीं हे। इस  नही हे।इसके सायही अदालतनेनिवती अदातत के आदेश कोशी रद्द करदिया  निर्देश के साथ ही अदालत ने फेमिली  उसके खिलाफ पत्नी ने जोभी आरोप अक्तूबर २०१ ७ से पल्नी को हर गाह को्ट क उस आदेश कोमी रद्दकर f, নিমস পনি ক্ষা ব েসান্ক 15 १५ हजार रुपय भरण पापण केलिए लगाए हे बह उचित नही हे। उसने अपनी मजी सेघर छोड़ा हे।इसके बाद हजार रुपय भरण पाोपण के लिएपली देने का निर्देश दिया था। पति को ओर পলীনমানী কদদিলীক্ীৎস মতো- को देने का निर्देश दिया गया था। से अदालत को बताया गया किःशादी इस संबंघ में पति अमित कच्छप ने पोषण के लिए आवेदन दिया। इस पर बादसेहीःपल्नी ने प्ति  के ক্রম্ত নিনী सुनवाई के बाद फेमिली कोरट ने पति हाईकोट में याचिका दायर कर रांची  काघर छोड़ दिया था। वहहर बार फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती दी  ক্িমা ন কিমী মৈপ স নঙ্ানা ননান  कोहर माह १५ हजार रुपय भरण थी। फेमिली कोट ने पति को ३० लगी। प्ति की ओरसेबताया गया कि॰ पोषण केलिए देने का निर्देश दिया। - ShareChat