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शऊरो इदराक़ की हदों पर तुम आज पहरे बिठा रहे हो। नज़र को तुम कैद कर रहे हो ज़बाँ पे ताले लगा रहे हो। हक़ीक़तों को छुपा रहे हो सदाक़तों को दबा रहे हो। मैं गीत गाता हूँ ज़िंदगी के तो मुझको बाग़ी बता रहे हो। #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #👍 डर के आगे जीत👌