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#✍️ अनसुनी शायरी
✍️ अनसुनी शायरी - मंजिलों का इंतजार नहीं , लीजिए, सफर का मजा हर गुजरते पल के 412, खुद को नया कीजिए, , दो लम्हों के बीच कीजिए, हर घड़ी का नशा , हंसते गाते जीने हर वजह ढूंढ लिया कीजिए, बहुत मुश्किलों से मिली जिंदगी, कीजिए, उस रब का शुक्र रोते रह जाने कुछ न होगा, बेहतरीन कीजिए।। वक्त के साथ, इसे मंजिलों का इंतजार नहीं , लीजिए, सफर का मजा हर गुजरते पल के 412, खुद को नया कीजिए, , दो लम्हों के बीच कीजिए, हर घड़ी का नशा , हंसते गाते जीने हर वजह ढूंढ लिया कीजिए, बहुत मुश्किलों से मिली जिंदगी, कीजिए, उस रब का शुक्र रोते रह जाने कुछ न होगा, बेहतरीन कीजिए।। वक्त के साथ, इसे - ShareChat