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✍मेरे पसंदीदा लेखक - Sharedhat गोथरी 39ಗe ज़िन्दगी की दौड़ में, तजुरबा कच्चा ही रह गया... | हम सीख न पाये 'फरेब' और दिल बच्चा ही रह गया... | बचपन में जहाँ चाहा हंस लेते थे, जहाँ चाहा रो लेते थे...| चाहिए पर अब मुस्कान को तमीज़ आँसुओं को तन्हाई... । और मुस्कुराते थे कभी बेपरवाह अन्दाज़ से हम भी तस्वीरों में... देखा है आज खुद को कुछ पुरानी  मुस्कुराने की वजह ढुढते है चलो तुम हमें ढूँढो , हम तुम्हें ढूंढते है...। Sharedhat गोथरी 39ಗe ज़िन्दगी की दौड़ में, तजुरबा कच्चा ही रह गया... | हम सीख न पाये 'फरेब' और दिल बच्चा ही रह गया... | बचपन में जहाँ चाहा हंस लेते थे, जहाँ चाहा रो लेते थे...| चाहिए पर अब मुस्कान को तमीज़ आँसुओं को तन्हाई... । और मुस्कुराते थे कभी बेपरवाह अन्दाज़ से हम भी तस्वीरों में... देखा है आज खुद को कुछ पुरानी  मुस्कुराने की वजह ढुढते है चलो तुम हमें ढूँढो , हम तुम्हें ढूंढते है...। - ShareChat