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#😒दर्द भरी शायरी🌸
😒दर्द भरी शायरी🌸 - Shiddat ೧ हिसाब कभी रखा ही नहीं मैने कितना पाया और कितना गंवाया है, चाहत ये है कि बस दुःख वहाँ से न मिले जहां मैंने सुकून लुटाया है। ( Shiddat ೧ हिसाब कभी रखा ही नहीं मैने कितना पाया और कितना गंवाया है, चाहत ये है कि बस दुःख वहाँ से न मिले जहां मैंने सुकून लुटाया है। ( - ShareChat