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sanam re - Author on ShareChat
sanam re
715 views • 9 days ago
#krantikaari

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  • kota laugh - Author on ShareChat
    kota laugh
    ##क्रांति दिवस
    क्रांति दिवस प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम ক্া সামাস কবন নাল भारत मां के वीर সপুনী' को नमन| सलीना  शेरी पूर्व पार्षद नगर निगम कोटा राजस्थान क्रांति दिवस प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम ক্া সামাস কবন নাল भारत मां के वीर সপুনী' को नमन| सलीना  शेरी पूर्व पार्षद नगर निगम कोटा राजस्थान
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  • Manish - Author on ShareChat
    Manish
    History of Barktullah bhopali #KRANTIKARI INDIA #Krantikari Group #barktullah university
    क्रांतिकारी और মক্কিকি स्वतंत्रता सेनानी थे बरकतउल्ला भोपाली मौलाना बरकतउल्ला भोपाली (१८५४ -१९२७) भारत के महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी थे। वे गदर पार्टी के प्रमुख संस्थापकों में शामिल थे। १९१३ में सैन फ्रांसिस्को में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भकना के साथ मिलकर गदर पार्टी AISI दिसंबर १९१५ को अफगानिस्तान में बनी भारत की 1 नियुक्त हुए।  पहली निर्वासित सरकार में प्रधानमंत्री ` इस अस्थायी सरकार में राजा महेंद्र प्रताप सिंह राष्ट्रपति थे। जापान के टोक्यो विश्वविद्यालय में ' हिंदुस्तानी ' भाषा के प्रोफेसर रहे। अमेरिका, जापान और यूरोप में रहकर भारत की आजादी के लिए समर्थन जुटाया। ब्रिटिश शासन के खिलाफ कई लेख और মামতা নিবI {డడ] मुस्लिम एकता और राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक थे। भोपाल विश्वविद्यालय का नाम बदलकर बरकतउल्ला विश्वविद्यालय रखा गया। १९२७ में अमेरिका के San Francisco में उनका निधन हुआ।  क्रांतिकारी और মক্কিকি स्वतंत्रता सेनानी थे बरकतउल्ला भोपाली मौलाना बरकतउल्ला भोपाली (१८५४ -१९२७) भारत के महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी थे। वे गदर पार्टी के प्रमुख संस्थापकों में शामिल थे। १९१३ में सैन फ्रांसिस्को में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भकना के साथ मिलकर गदर पार्टी AISI दिसंबर १९१५ को अफगानिस्तान में बनी भारत की 1 नियुक्त हुए।  पहली निर्वासित सरकार में प्रधानमंत्री ` इस अस्थायी सरकार में राजा महेंद्र प्रताप सिंह राष्ट्रपति थे। जापान के टोक्यो विश्वविद्यालय में ' हिंदुस्तानी ' भाषा के प्रोफेसर रहे। अमेरिका, जापान और यूरोप में रहकर भारत की आजादी के लिए समर्थन जुटाया। ब्रिटिश शासन के खिलाफ कई लेख और মামতা নিবI {డడ] मुस्लिम एकता और राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक थे। भोपाल विश्वविद्यालय का नाम बदलकर बरकतउल्ला विश्वविद्यालय रखा गया। १९२७ में अमेरिका के San Francisco में उनका निधन हुआ।
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