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#❤️मेरी माँ मेरी दुनिया ❤️ #🌍भारतीय इतिहास📚 #🛕मंदिर दर्शन🙏 #🏠घर-परिवार #🙏प्रातः वंदन
❤️मेरी माँ मेरी दुनिया ❤️ - की कोशिश की पर नाकाम अकबर ने भी बुझाने रहा! देखिए ज्वालामुखी मंदिर का अद्भुत चमत्कार। ज्वालाः हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित .प्राकृतिक  1 ज्वालामुखी मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है। यहाँ धरती से निकलने वाली नौ असली ज्वालाओं की पूजा माता के रूप में की जाती है। २. बिना ईंधन के जलनाः ये ज्वालाएं सदियों से जल रही हैं। तेल, इन्हें जलाने के लिए किसी घी या लकड़ी की जरूरत नहीं पड़ती , यह आज भी एक रहस्य है। ३. माता की जीभः धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ माता सती की जीभ गिरी थी, इसलिए इसे बहुत पवित्र शक्तिपीठ माना जाता है। ४. अकबर की कोशिशः कहा जाता है कि मुगल राजा अकबर की बहुत कोशिश की ने इन ज्वालाओं को पानी से JN थी, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया और हार मान ली। ५. नौ देवियों का रूपः मंदिर में जलने वाली नौ ज्वालाओं को महाकाली,   महालक्ष्मी 3 mT-3 mT  ೩4 ( और सरस्वती) का रूप माना जाता है। की कोशिश की पर नाकाम अकबर ने भी बुझाने रहा! देखिए ज्वालामुखी मंदिर का अद्भुत चमत्कार। ज्वालाः हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित .प्राकृतिक  1 ज्वालामुखी मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है। यहाँ धरती से निकलने वाली नौ असली ज्वालाओं की पूजा माता के रूप में की जाती है। २. बिना ईंधन के जलनाः ये ज्वालाएं सदियों से जल रही हैं। तेल, इन्हें जलाने के लिए किसी घी या लकड़ी की जरूरत नहीं पड़ती , यह आज भी एक रहस्य है। ३. माता की जीभः धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ माता सती की जीभ गिरी थी, इसलिए इसे बहुत पवित्र शक्तिपीठ माना जाता है। ४. अकबर की कोशिशः कहा जाता है कि मुगल राजा अकबर की बहुत कोशिश की ने इन ज्वालाओं को पानी से JN थी, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया और हार मान ली। ५. नौ देवियों का रूपः मंदिर में जलने वाली नौ ज्वालाओं को महाकाली,   महालक्ष्मी 3 mT-3 mT  ೩4 ( और सरस्वती) का रूप माना जाता है। - ShareChat