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#✍️ अनसुनी शायरी
✍️ अनसुनी शायरी - unuunGMruwritor मैं कबरतकले केजाऊंँगा तेरे सारे राज़.. मैं दुश्मन तेरा हूं॰.तेरी इज्ज़त का नही !! 6400 001 unuunGMruwritor मैं कबरतकले केजाऊंँगा तेरे सारे राज़.. मैं दुश्मन तेरा हूं॰.तेरी इज्ज़त का नही !! 6400 001 - ShareChat