बिहार की जनता के नाम खुला पत्रप्रिय बिहारवासियों,नमस्कार।यह पत्र आपके स्वास्थ्य, आपकी जेब और हमारे बिहार के स्थानीय किसानों के भविष्य से जुड़ा है। बाजार में पैकेज्ड दूध के कई विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन हमें यह सोचने की जरूरत है कि हमारा पैसा कहां जा रहा है। अमूल, मदर डेयरी या राज डेयरी जैसे ब्रांड्स का दूध खरीदने के बजाय हमें अपने राज्य के विकल्पों को चुनना चाहिए।आपको इन बाहरी या अन्य गैर-सरकारी ब्रांड्स का दूध क्यों नहीं खरीदना चाहिए, इसके मुख्य कारण नीचे दिए गए हैं:स्थानीय किसानों को नुकसान: बाहरी कंपनियों को पैसा देने से हमारे बिहार के ग्रामीण पशुपालकों और किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल पाता है।बिहार का पैसा बाहर जाना: जब आप इन ब्रांड्स का दूध खरीदते हैं, तो बिहार का पैसा दूसरे राज्यों की अर्थव्यवस्था में चला जाता है।ताजगी और शुद्धता पर सवाल: लंबी दूरी से आने वाले दूध को सुरक्षित रखने के लिए अक्सर प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।महंगा दाम: बड़े कॉर्पोरेट ब्रांड्स अपने विज्ञापन और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी दूध की कीमत में जोड़कर आपसे वसूलते हैं।हमारा विकल्प: 'सुधा डेयरी' (COMPFED)बिहार की अपनी सहकारी संस्था 'सुधा' सीधे हमारे राज्य के किसानों से दूध खरीदती है। सुधा दूध खरीदने के फायदे:किसानों की खुशहाली: आपके पैसे का सीधा हिस्सा बिहार के गरीब और मेहनती पशुपालकों के घर जाता है।पूरी तरह ताजा और शुद्ध: यह दूध स्थानीय स्तर पर प्रोसेस होता है, जिससे इसकी ताजगी बरकरार रहती है।बिहार की आत्मनिर्भरता: सुधा को चुनकर आप 'लोकल फॉर वोकल' अभियान को मजबूत करते हैं और बिहार को आत्मनिर्भर बनाते हैं।हमारा संकल्प:आइए आज ही से बाहरी और निजी डेयरी ब्रांड्स (अमूल, मदर, राज) का बहिष्कार करें। अपने परिवार की सेहत और बिहार की तरक्की के लिए केवल स्थानीय और भरोसेमंद विकल्प चुनें।जय बिहार, जय बिहार के किसान! #बिहार #👍 डर के आगे जीत👌 #😇 चाणक्य नीति #🌸पॉजिटिव मंत्र #🤩पॉजिटिव स्टोरी✌

