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#मेरी बात लोगो तक ##सवेरा #bate
मेरी बात लोगो तक - और फिर एक दिन गहरी साँस ले कर के छोड़ देते हैं हम - उम्मीद का दामन। कर लेते हैं हम स्वीकार अंधेरा | নান নান ৪ঁ কি उजाले अपने नहीं। | और फिर एक दिन गहरी साँस ले कर के छोड़ देते हैं हम - उम्मीद का दामन। कर लेते हैं हम स्वीकार अंधेरा | নান নান ৪ঁ কি उजाले अपने नहीं। | - ShareChat