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✍️ साहित्य एवं शायरी - चाँद भी क्या ख़ूब है न सर पर घूंघट है न चेहरे पे बुरका, कभी करवाचौथ का हो गया तो कभी ईद का तो कभी ग्रहण का 37R. ज़मीन पर होता तो टूट कर विवादों में होता सुनवाईयों में होता अदालत की अख़बार की में होता सुर्खियों : लेकिन. 2 शुक्र है आसमान में बादलों की गोद में है इसलिए ज़मीन में कविताओं और गज़लों में महफ़ूज़ है चाँद भी क्या ख़ूब है न सर पर घूंघट है न चेहरे पे बुरका, कभी करवाचौथ का हो गया तो कभी ईद का तो कभी ग्रहण का 37R. ज़मीन पर होता तो टूट कर विवादों में होता सुनवाईयों में होता अदालत की अख़बार की में होता सुर्खियों : लेकिन. 2 शुक्र है आसमान में बादलों की गोद में है इसलिए ज़मीन में कविताओं और गज़लों में महफ़ूज़ है - ShareChat